
सुंदर-सुंदर लाल टमाटर
खाने को मन करता,
खट्टा-मीठा इसका स्वाद
सब का मन है हरता।
मम्मी इसको सब्जी कहती
‘मैम’ है कहती फल,
छोटी बहना मेरी इसको
कहती सदा टमाटल।
मम्मी सूप पिलाती इसका
और सलाद में देती रहती,
सॉस टमाटर का खाने को
हमारी लार टपकती रहती।
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1.सुबह, दोपहर. शाम को,
मैं लोगों को भाती।
सब्जी के संग मेल है,
आदि कटे तो पाती।
2.लख से मेरा नाम है,
हूँ नवाबों का शहर।
राजधानी एक राज्य की,
नहीं मैं कोई गैर।
3.एक किले के लाख द्वार,
नहीं किसी के कोई कपाट,
फिर भी कोई घुस न पाए,
राजा सोए डाल के खाट।
4.दिन में चलती, रात को चलती,
नहीं करती कभी आराम।
सब उसको हैं देखा करते,
दीवार पर उसका धाम।
5.इधर की बात उधर मैं करता,
उधर की इधर बताता।
चुगलखोर पर कहे न कोई,
सबके काम मैं आता।
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• पहेलियों के उत्तर:1.चपाती 2.लखनऊ 3.मच्छरदानी 4.दीवार घड़ी 5.टैलीफोन
श्याम सुन्दर अग्रवाल
काले रंग का कौवा होता,
काली ही कोयल होती ।
कोयल का सम्मान करें सब,
कौवे की दुर्गति होती ।
रंग से कुछ फर्क न पड़ता,
पड़े गुणों का मोल ।
कौवे की कर्कश काँव-काँव,
कोयल के मीठे बोल ।
प्यार अगर पाना है बच्चो,
मधुर आवाज निकालो मुख से,
कानों में रस घोलो ।
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बच्चो, तुम्हारी सभी पुस्तकें कागज से बनी हुई होंगी। तुम सोचते होगे कि पुस्तकें केवल कागज से ही बनी होती हैं। मगर ऐसा नहीं है। पहले लोग वृक्षों के चौड़े पत्तों, लकड़ी के फट्टों तथा पत्थर पर भी लिखते थे। म्यांमार देश में पत्थर से बनी एक विशाल पुस्तक है। जानते हो कि यह पुस्तक किस पत्थर से बनी है? यह बनी है संगमरमर से। माली भाषा में लिखी इस पुस्तक में कुल 1460 पृष्ठ हैं। प्रत्येक पृष्ठ की लम्बाई 5 फुट, चौड़ाई 3.5 फुट तथा मोटाई आधा फुट है। इस पुस्तक की कुल लम्बई 1.6 किलोमीटर तथा कुल वजन 726 टन है। यह दुनिया की सबसे बड़ी पुस्तक कहलाती है।
यह पुस्तक मांडले पहाडियों की घाटी में बने एक पैगोडा के मैदान में स्तूपों के रूप में खड़ी है। इसके पन्नों के प्रत्येक सैट पर छत बनी है।
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