शुक्रवार, 17 जुलाई 2009

मकई के दाने











नभ में देख हजारों तारे,
मुन्ना सोचता रहता।
क्या चीज है, किसकी है?
जवाब खोजता रहता।

ये क्या दादी, मुझे बताओ,
जो ऊपर दिखरे है।
दादी बोली-प्यारे बच्चे,
ये तो मोती बिखरे हैं।

मुन्ना बोला-नहीं ये मोती,
तू माने न माने ।
बिखर गए चंदा-मामा से,
मकई के फूले दाने।
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2 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त : ने कहा…

बहुत ही प्यारी है ये कविता

MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर ने कहा…

बहुत सुन्दर