बुधवार, 29 जुलाई 2009

एक लोटा पानी



श्याम सुन्दर अग्रवाल
बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में राधा नाम की एक औरत रहती थी। राधा बहुत ही समझदार थी। उसकेपास एक भेड़ थी। भेड़ जो दूध देती, राधा उसमें से कुछ दूध बचा लेती। उस दूध से वह दही जमा लेती। दही सेमक्खन निकाल लेती। छाछ तो वह पी लेती, लेकिन मक्खन से घी निकाल लेती। उस घी को राधा एक मटकी मेंडाल लेती। धीरे-धीरे मटकी घी से भर गई।
राधा ने सोचा, अगर घी को नगर में जा कर बेचा जाए तो काफी पैसे मिल जाएंगे। इन पैसों से वह घर की ज़रूरतका कुछ सामान खरीद सकती है। इसलिए वह घी की मटकी सिर पर उठा कर नगर की ओर चल पड़ी।
उन दिनों आवा-जाही के अधिक साधन नहीं थे। लोग अधिकतर पैदल ही सफर करते थे। रास्ता बहुत लंबा था।गरमी भी बहुत थी। इसलिए राधा जल्दी ही थक गई। उसने सोचा, थोड़ा आराम कर लूँ। आराम करने के लिए वहएक वृक्ष के नीचे बैठ गई। घी की मटकी उसने एक तरफ रख दी। वृक्ष की शीतल छाया में बैठते ही राधा को नींद आगई। जब उसकी आँख खुली तो उसने देखा, घी की मटकी वहाँ नहीं थी। उसने घबरा कर इधर-उधर देखा। उसे थोड़ीदूर पर ही एक औरत अपने सिर पर मटकी लिए जाती दिखाई दी। वह उस औरत के पीछे भागी। उस औरत के पासपहुँच राधा ने अपनी मटकी झट पहचान ली।
राधा ने उस औरत से अपनी घी की मटकी माँगी। वह औरत बोली, “यह मटकी तो मेरी है, तुम्हें क्यों दूँ।”
राधा ने बहुत विनती की, परंतु उस औरत पर कुछ असर न हुआ। उसने राधा की एक न सुनी। राधा उसकेसाथ-साथ चलती नगर पहुँच गई। नगर में पहुँच कर राधा ने मटकी के लिए बहुत शोर मचाया। शोर सुनकर लोगएकत्र हो गए। लोगों ने जब पूछा तो उस औरत ने घी की मटकी को अपना बताया। लोग निर्णय नहीं कर पाए किवास्तव में मटकी किसकी है। इसलिए वे उन दोनों को हाकिम की कचहरी में ले गए।
राधा ने हाकिम से कहा, “हुजूर! इस औरत ने मेरी घी की मटकी चुरा ली है। मुझे वापस नहीं कर रही। कृपया इससेमुझे मेरी मटकी दिला दें। मुझे यह घी बेचकर घर के लिए जरूरी सामान खरीदना है।”
“तुम्हारे पास यह घी कहाँ से आया ? और इसने कैसे चुरा लिया ?” हाकिम ने पूछा।
“मेरे पास एक भेड़ है। उसी के दूध से मैने यह घी जमा किया है। रास्ते में आराम करने के लिए मैं एक वृक्ष कीछाया में बैठी तो मुझे नींद आ गई। तभी यह औरत मेरी मटकी उठा कर चलती बनी।”
हाकिम ने उस औरत से पूछा तो वह बोली, “हुजूर, आप ठीक-ठीक न्याय करें. मैने पिछले माह ही एक गाय खरीदीहै, जो बहुत दूध देती है। मैने यह घी अपनी गाय के दूध से ही तैयार किया है। जरा सोचिए, एक भेड़ रखने वालीऔरत एक मटकी घी कैसे जमा कर सकती है?”
हाकिम भी दोनों की बातें सुनकर दुविधा में पड़ गया। वह भी निर्णय नहीं कर पा रहा था कि वास्तव में घी कीमटकी किसकी है। उसने दोनों औरतों से पूछा, “क्या तुम्हारे पास कोई सबूत है ?”
दोनों ने कहा कि उनके पास कोई सबूत नहीं है।
तब हाकिम को एक उपाय सूझा। उसने दोनों औरतों से कहा, “वर्षा के पानी से कचहरी के सामने जो कीचड़ जमा होगया है, उसमें मेरे बेटे का एक जूता रह गया है। तुम पहले वह जूता निकाल कर लाओ, फिर मैं फैसला करूँगा।”
राधा और वह औरत कीचड़ में घुस कर जूता ढूँढ़ने लगीं। वे बहुत देर तक कीचड़ में हाथ-पाँव मारती रहीं, परंतु उन्हेंजूता नहीं मिला। तब हाकिम ने उन्हें वापस आ जाने को कहा। दोनों कीचड़ में लथपथ हो गईं थीं। हाकिम नेचपरासी से उन्हें एक-एक लोटा पानी देने को कहा, ताकि वे हाथ-पाँव धो कर कचहरी में हाज़िर हो सकें।
दोनों को एक-एक लोटा पानी दे दिया गया। राधा ने तो उस एक लोटा पानी में से ही अपने हाथ-पाँव धो कर थोड़ा-सापानी बचा लिया। परंतु गाय वाली वह औरत एक लोटा पानी से हाथ भी साफ नहीं कर पाई। उसने कहा, “इतनेपानी से क्या होता है! मुझे तो एक बाल्टी पानी दो, ताकि मैं ठीक से हाथ-पाँव धो सकूँ।”
हाकिम के आदेश से उसे और पानी दे दिया गया।
हाथ-पाँव धोने के बाद जब राधा उस औरत के साथ कचहरी में पहुँची तो हाकिम ने फैसला सुना दिया, “घी की यहमटकी भेड़ वाली औरत की है। गाय वाली औरत जबरन इस पर अपना अधिकार जमा रही है।”
सब लोग हाकिम के न्याय से बहुत खुश हुए क्योंकि उन्होंने स्वयं देख लिया था कि भेड़ वाली औरत ने कितनेसंयम से सिर्फ एक लोटा पानी से ही हाथ-पाँव धो लिए थे। गाय वाली औरत में संयम नाम मात्र को भी नहीं था। वहभला घी कैसे जमा कर सकती थी।
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12 टिप्‍पणियां:

AlbelaKhatri.com ने कहा…

kahaani lekin sach se bhi adhik sach lagti hai ye kahaani........
atyant prerak prasang..
waah
waah !

Nirmla Kapila ने कहा…

बहुत सुन्दर कहानी है बधाई

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

बहुत ही प्रेरणास्‍पद कहानी है, बधाई। मेरे ब्‍लाग में अभी मैंने एक लोरी पोस्‍ट की है कृपया देखें और प्रतिक्रिया भी दें।

किरण गुप्ता ने कहा…

अलबेला खत्री जी, निर्मला कपिला जी व डॉ. अजीत गुप्ता जी ब्लाग पर आने और अपने विचार व्यक्त करने के लिए आप सब की आभारी हूँ।

Kamlesh ने कहा…

कहानी बच्चों को संयम की अच्छी सीख देती है।

ASHOK ने कहा…

बहुत ही सुंदर कहानी के लिये बधाई।

Science Bloggers Association ने कहा…

रोचक कहानी। आभार।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

HEY PRABHU YEH TERA PATH ने कहा…

बहुत सुन्दर कहानी
आभार/ मगल भावनाऐ
हे! प्रभु यह तेरापन्थ
मुम्बई-टाईगर
SELECTION & COLLECTION

Usha ने कहा…

बच्चों के लिए बहुत बढ़िया कहानी, शुभकामनाएं।

M VERMA ने कहा…

कहानी बहुत अच्छी लगी. प्रेरक भी है. आपकी किस्सागोई का अन्दाज भी बहुत अच्छा लगा.
बहुत खूब

किरण गुप्ता ने कहा…

ब्लाग पर आने व अपनी राय देकर मेरा साहस बढ़ाने के लिए आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद।

Ajay ने कहा…

कहानी प्रेरणादायक है, पसंद आई।