शुक्रवार, 3 जुलाई 2009

आओ शोर मचाएँ







बड़ा मजा आता है हमको,
हम तो शोर मचाएँगे,
पता है आकर टीचर जी,
हमको डाँट लगाएँगे।

करें नहीं शरारत कोई,
न हीं शोर मचाएँ।
चुप बैठना खेल बड़ों का,
हम कैसे समय बिताएँ?
*****

8 टिप्‍पणियां:

Dhiraj Shah ने कहा…

बच्चो का काम ही है शोर मचना

ओम आर्य ने कहा…

मज़ा आ गया ............भाईया

ACHARYA RAMESH SACHDEVA ने कहा…

YES KYA BAAT H JI

RAMESH SACHDEVA

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Dr.Aditya Kumar ने कहा…

Bachpan ka maja hii alag hai.

Science Bloggers Association ने कहा…

अरे भई, जरा जोर से मचाओ न। यहां तक आवाज नहीं आ रही।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

आओ शोर मचाएं ... हा हा हा ...
शोर मचाने का विचार ही अपने आप में बहुत सुन्दर है.

रानी पात्रिक ने कहा…

खूब बनी है कविता। और मचाओ शोर पर यह न कहना कि चुप रहना बड़ों का काम है क्यों कि हम भी बहुत शोर मचाया कहते हैं।