रविवार, 30 अगस्त 2009

पढ़ना है जी पढ़ना है








भारी बस्ता उठा के रस्ता,

कैसे भी तय करना है।

पढ़ना है जी पढ़ना है

पढ़-लिख आगे बढ़ना है।


माँ-बापू को मिलें सभी सुख,

भूखे अब नहीं मरना है।

लड़ना अपने हक की खातिर,

नहीं किसी से डरना है।


नया ज्ञान पा कर के हमको,

हर दुश्मन से लड़ना है।

पढ़ना है जी पढ़ना है,

पढ़-लिख आगे बढ़ना है।

*****



6 टिप्‍पणियां:

Kamlesh ने कहा…

आगे बढ़ना है तो पढ़ना तो पड़ेगा ही। सही संदेश देती एक अच्छी कविता।

ASHOK ने कहा…

बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कविता, बधाई.

सुनीता कुमारी ने कहा…

कविता अच्छी लगी, ब्लॉग की रचनाएं सार्थक होती हैं।

समयचक्र ने कहा…

शिक्षाप्रद कविता, बधाई

समयचक्र ने कहा…

शिक्षाप्रद कविता, बधाई

समयचक्र ने कहा…

शिक्षाप्रद कविता, बधाई