मंगलवार, 11 अगस्त 2009

भगवान की गायें


श्याम सुन्दर अग्रवाल


बदनपुर नाम का एक गाँव था। गाँव में एक सौ के लगभग परिवार रहते थे। अधिकतर लोग खेती-बाड़ी का काम करते थे। लोग बहुत परिश्रमी थे। खेती केवल वर्षा पर निर्भर थी। इसलिए फसल कभी अच्छी हो जाती, कभी ठीक-ठीक।

एक सन्यासी ने गाँववालों से कहा कि अगर वे गाँव में एक मंदिर बनवा लें तो गाँव में खूब बारिश होगी। गाँववालों ने मिल कर एक मंदिर बनवा लिया। गाँव के लोग तो सब भोले-भाले व सीधे थे। किसी को पूजा-पाठ करना नहीं आता था। गाँव में कोई ब्राह्मण परिवार भी नहीं था। शादी-ब्याह के अवसर पर भी आसपास के गाँवों से ही ब्राह्मण आ जाते थे। लोगों ने सोचा, अगर उनके मंदिर में कोई पुजारी आकर रहने लगे तो अच्छा हो। भगवान की पूजा-पाठ का काम ठीक से होता रहेगा। भगवान खुश रहेंगे तो उन पर दया करेंगे।

पास के गाँव में रामचरण नाम का एक पुजारी रहता था। वह बहुत लालची व धूर्त था। इसलिए किसी भी मंदिर में अधिक समय तक नहीं टिक पाता था। उन दिनों कोई काम न होने के कारण वह भूखा मर रहा था। उसे पता चला तो वह अपनी पत्नी के साथ बदनपुर दौड़ा चला आया। उसके पास तन के वस्त्रों के अतिरिक्त मात्र दो मरियल-सी गायें ही थीं।

मंदिर में पुजारी के आ जाने से बदनपुर के लोग बहुत खुश हुए। वे तीनों वक्त पुजारी को खाने के लिए भोजन पहुँचाते। उन्होंने उसे पहनने को अच्छे वस्त्र भी दिए। मंदिर में सुबह-शाम आरती होने लगी। गाँव के लोग आरती में भाग लेने मंदिर जाते।

पुजारी रामचरण को भरपेट भोजन मिलने लगा तो उसके भीतर का लालच व छल-कपट जाग उठा। वह सवेरे व सायं आरती के बाद लोगों से कहता,आप भगवान के नाम पर अधिक से अधिक दान दें। आप जो देंगे, भगवान आपको उसका सात गुणा देगा।

भोले-भाले लोग पुजारी की बात पर विश्वास कर थोड़ा बहुत उसे देते रहते। मगर इतने से लालची रामचरण का मन नहीं भरता। वह कभी गाय का दूध बेचने का काम किया करता था। उसने सोचा, अगर वह लोगों को फुसला कर भगवान के नाम पर उनकी गायें ले ले तो उसका दूध का काम चल सकता है।

उसने गाँव के उन लोगों पर नज़र रखनी शुरू कर दी, जिनके पास गायें थीं। सुबह की आरती के बाद वह उनमें से किसी एक को रोक लेता तथा गाय दान करने के लिए उकसाता । वह कहता, तुम भगवान को एक गाय दोगे तो वह आपको सात गायें देगा।

लोग उस धूर्त की बातों में आने लगे। एक-एक कर उसने चार गरीब किसानो से उनकी गायें दान में ले लीं। लोगों से गायें लेकर वह बहुत खुश था। अब वह फिर से दूध बेचने लगा।

उस गाँव में सतपाल नाम का एक किसान भी रहता था। उसके पास थोड़ी-सी जमीन थी। खेती से पैदावार भी ठीक-ठीक ही होती थी। घर में पति-पत्नी दोनों ही थे। उनके कोई बच्चा नहीं था। इसलिए गुज़र-बसर ठीक से हो जाती थी। सतपाल के पास एक बढ़िया नस्ल की गाय थी। वह अपनी गाय को बहुत प्यार करता था। वह गाय की सेवा में भी कोई कसर नहीं छोड़ता था। उसे भी पुजारी कई बार गऊदान करने के लिए कह चुका था। परंतु सतपाल का मन नहीं मान रहा था।

एक दिन प्रात: सतपाल अपनी पत्नी के साथ मंदिर गया तो पुजारी ने सब लोगों के सामने कहा, आज के दिन गऊदान का बहुत महत्व है। जो लोग गऊदान करेंगे, भगवान उन्हें बहुत जल्द एक की सात गायें देगा। भगवान उनके घर बेटा भी देगा।

घर पहुँच कर सतपाल की पत्नी बोली, हो सकता है पुजारी जी सच कह रहे हों। क्यों न हम अपनी गाय दान कर दें। घर में सात गायें हो जायेंगी और एक बेटा भी। हमारा मन लगा रहेगा।

सतपाल ने पत्नी की बात मान ली। वह तुरंत अपनी गाय पुजारी को दे आया। इतनी अच्छी गाय पाकर पुजारी खुशी से पागल हो उठा। उसके मन की इच्छा पूरी हो गई थी।

पुजारी ने अन्य गायों के साथ सतपाल की गाय भी चरने के लिए छोड़ दी। सतपाल की गाय थी बहुत तेज। नित्य की तरह चरने के बाद सायं को उसने सतपाल के घर का रुख कर लिया। उसके पीछे-पीछे पुजारी की शेष छ: गायें भी सतपाल के घर चली गईं।

इतनी जल्दी सात गायें पाकर सतपाल बहुत खुश था। उसने पत्नी से कहा, पुजारी जी ठीक ही कहते थे। भगवान ने हमें आज ही सात गायें दे दीं।

जब गायें पुजारी के घर नहीं पहुँची तो उन्हें ढूँढ़ने वह गाँव में निकला। गायें ढूँढ़ता वह सतपाल के घर भी गया। वहाँ अपनी गायें देखकर वह बोला, ये सब तो मेरी गायें हैं, मेरे घर छोड़कर आओ।

सतपाल बोला, पुजारी जी, ये आपकी नहीं, भगवान की गायें हैं। आपने ही तो सुबह कहा था, भगवान आपको सात गायें देगा। सो उसने हमें दे दीं।

जब सतपाल गायें देने को राजी न हुआ तो पुजारी गाँव के मुखिया के पास गया। मुखिया ने भी कहा, आज आपने ही तो कहा था कि भगवान एक बदले सात गायें देगा। सो भगवान ने उसके घर भेज दीं।

पुजारी अपना-सा मुँह लेकर आ गया। लालच में उसकी अपनी दो गायें भी चली गईं।

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2 टिप्‍पणियां:

ASHOK ने कहा…

बच्चों के लिए बहुत ही मनोरंजक कहानी है. भोले-भाले लोगोँ को लूटने वालों के लिए भी एक सबक है।

सुनीता कुमारी ने कहा…

बहुत ही सुंदर कहानी है।