बुधवार, 19 अगस्त 2009

राजा दुम दबाकर भागा







रोक कार को बोला शेर,
खोलो खिड़की करो देर।
जंगल का मैं राजा हूँ,
कहते मुझको बब्बर शेर।

जंगल-दिवसआज हमारा,
करनी मुझको लंबी सैर।
अगर नहीं करवाओगे तो,
बच्चू नहीं तुम्हारी खैर।

रिंग-मास्टर सर्कस का हूँ,
नाम है मेरासागा
कहा कार वाले ने तो,
राजा दुम दबाकर भागा।
*****

6 टिप्‍पणियां:

श्यामल सुमन ने कहा…

सुन्दर बाल कविता किरण जी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

सहज साहित्य ने कहा…

बहुत ही परिपक्व रचना है । आप बाल-मन के अनुकूल लिख रहे हैं ।कोटिश: शुभकामनाएँ !
रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

Kamlesh ने कहा…

बहुत ही प्यारी कविता, तारीफ के ळिए शब्द नहीं हैं…

किरण गुप्ता ने कहा…

ब्लाग पर आने व अपनी राय देने के लिए आप सब का धन्यवाद।

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

अति सुन्दर बालकविता!!!
आभार्!

ASHOK ने कहा…

मन मोह लेने वाली कविता के लिए शुक्रिया।