बुधवार, 5 अगस्त 2009

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ के दो शिशु गीत











1.मोर

आसमान में उड़ते बादल
उमड़-घुमड़ जब करते शोर।
रंग-बिरंगे पंख खोलकर
खूब नाचता है तब मोर।
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2. मुर्गा बोला


मुर्गा
बोला कुकुड़ू कूँ
जाग उठा मैं, सोता तू।

सूरज भी अब जाग गया
दूर अँधेरा भाग गया।

बिस्तर छोड़ो उठ जाओ
मुँह धोकर बाहर आओ।

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4 टिप्‍पणियां:

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर!!

Ajay ने कहा…

हिमांशु जी के दोनों गीत बहुत प्यारे लगे.

ASHOK ने कहा…

गीत पढ़कर मजा आ गया, बहुत खूब।

हेमन्त कुमार ने कहा…

अच्छी बाल कविता..।