सोमवार, 1 जून 2009

नेकी का बदला


एक खाड़ी में एक भयानक घड़ियाल रहता था। खाड़ी के किनारे पर एक बड़ा-सा गड्ढा था। गड्ढा बहुत सुरक्षित था। घड़ियाल ने उस गड्ढे को ही अपना घर बनाया हुआ था। वहाँ पर वह आसानी से अपना शिकार ढूँढ़ लेता था।
एक बार ऐसा हुआ कि खाड़ी में पानी कम हो गया। पानी किनारे से बहुत पीछे हट गया। घड़ियाल को पता ही न चला कि उसका घर खाड़ी से दूर हो गया है। जब गड्ढे का पानी सूख गया तो वह अपनी जान बचाने का उपाय सोचने लगा।
एक दिन गाँव का एक लड़का सूखी लकड़ियां चुनता हुआ वहाँ से गुजर रहा था। घड़ियाल को देख कर लड़का हँसा और बोला, “तुम यहाँ कैसे आ गये?”
घड़ियाल बोला, “मैं राह भटक कर यहाँ आ गया। कृपा कर मुझे खाड़ी के पानी तक पहुँचा दो। तुम्हारा भला होगा।”
लड़के को उस पर दया आ गयी। उसने घड़ियाल को अपनी चटाई में लपेटा और उठा कर पानी की तरफ चल पड़ा। पानी तक पहुँच कर लड़के ने उसे उतारना चाहा तो वह बोला, “मुझे गहरे पानी तक ले चलो।” जब पानी कंधों तक आ गया तो उसने कहा, “हाँ यह जगह ठीक है, मुझे यहाँ उतार दो।”
लड़के ने घड़ियाल को वहाँ पानी में उतार दिया। पानी में पहुँचते ही घड़ियाल के तेवर बदल गये। उसने वापस लौट रहे लड़के को पकड़ लिया और बोला, “मैं बहुत दिनों से भूखा हूँ। आज तो तुम्हें खा कर ही अपनी भूख मिटाऊँगा।”
लड़का बहुत हैरान हुआ। उसने कहा, “मैने तो तुम्हारी जान बचाई है। क्या तुम्हारे यहाँ नेकी का बदला बदी से दिया जाता है?”
“नेकी का बदला तो सदा बुरा ही होता है।” घड़ियाल बोला।
“तुम्हारा मुझे खाने की सोचना ही गलत है। नेकी का बदला तो सदा नेकी ही होता है।” लड़के ने कहा।
घड़ियाल ने कहा, “ऐसे करते हैं, हम तीन लोगों से पूछ लेते हैं। अगर तीनों मेरी बात से सहमत हुए तो मैं तुम्हें खा जाऊँगा।”
लड़के ने घड़ियाल का सुझाव स्वीकार कर लिया।
तभी एक बूढ़ी गाय किनारे पर पानी पीने आई। घड़ियाल गाय से बोला, “दादी माँ, तुम बुज़ुर्ग हो, समझदार हो। हमें बताओ कि नेकी का बदला नेकी होता है या बदी?”
“नेकी के बदले तो बुराई ही मिलती है।” गाय बोली, “अब मुझे ही देख लो, जब मैं जवान थी, बच्चे और खाद देती थी, तब तो मेरी सेवा होती थी। अब बुढ़ापा आया तो मुझे घर से निकाल दिया गया। किसी के साथ कितनी भी भलाई कर लो, बदले में तो बुराई ही मिलती है।”
थोड़ी देर बाद वहाँ एक बूढ़ा घोड़ा पानी पीने आया। घड़ियाल ने उससे भी वही सवाल किया। घोड़ा भी बोला, “नेकी का बदला कभी नेकी से नहीं मिलता। मुझे देख लो। एक समय था, जब मुझे युद्ध में ले जाया जाता था। मैने अनेक राजाओं की जान बचाई। तब मैं शाही अस्तबल में रहता था। बहुत से नौकर-चाकर मेरे आगे-पीछे घूमा करते थे। अब मैं बूढ़ा हो गया हूँ तो मुझे कोई घास भी खाने को नहीं देता। नेकी का बदला यह मिला कि मैं दर-दर भटक रहा हूँ।”
घड़ियाल बोला, “दो तो मेरी बात से सहमत हो गये, तीसरा भी ऐसा ही कहेगा।”
“ठीक है,” लड़का बोला, “अगर तीसरे ने भी यही कहा तो तुम मुझे खा लेना।”
तभी एक खरगोश घूमता हुआ वहाँ आ गया। घड़ियाल उससे बोला, “मेरे आदरणीय चाचा जी! आपने जमाना देखा है, आप इस लड़के को समझाएं कि नेकी का बदला सदा बदी ही होता है।”
खरगोश आश्चर्य में डूब कर बोला, “पहले मुझे सारी बात विस्तार से बताओ।”
घड़ियाल और लड़के ने मिल कर उसे सारी बात बताई। खरगोश ने चौंक कर अपने कान झटके, “लड़का तुम्हें वहाँ से उठा कर यहाँ तक लाया है?”
“हाँ, मैं इसे उठाकर लाया हूँ।” लड़का बोला।
“विश्वास करो,” घड़ियाल ने कहा, “यह लड़का ही मुझे उठा कर यहाँ लाया है।”
“मुझे तो विश्वास नहीं होता। लड़के, इसे वैसे ही फिर उठा कर दिखाओ।”
लड़के ने घड़ियाल को चटाई में लपेटा और उठा लिया।
“अब तुम्हें विश्वास आ गया?” घड़ियाल बोला।
“उठा लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन यह तुम्हें उठा कर इतनी दूर से ला सकता है, मुझे नहीं लगता।” खरगोश बोला।
“हाँ, यही मुझे सिर पर उठा कर इतनी दूर लाया भी है।” घड़ियाल ने कहा।
“तो फिर यह तुम्हें वहाँ तक लेजाकर दिखाए।”
लड़का घड़ियाल को सिर पर उठा कर वापस उसी गड्ढे तक ले गया।
“अब तो तुम्हें पूरा विश्वास हो गया।” घड़ियाल ने खरगोश से कहा।
“हाँ, अब तो विश्वास हो गया।” खरगोश बोला। फिर उसने लड़के से कहा, “इस शैतान को अपने घर ले जाओ और पका कर सारे परिवार को खिला दो। जो नेकी का बदला बुराई से देना चाहे, उसके साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।”
लड़का घड़ियाल को उठा कर अपने घर ले गया।
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