शुक्रवार, 19 नवंबर 2010

सवाल



रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’


प्यारा-प्यारा चंदा मामा

लिए साथ में आता तारे

पंख लगाकर सूरज आता

रोज सवेरे पास हमारे


तितली को सुन्दर रंगो के

ये कपड़े पहनाए किसने

ठण्डी-ठण्डी हवा चलाई

सुन्दर फूल खिलाए किसने?

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बुधवार, 10 नवंबर 2010

पहेलियाँ-10

1.कान नहीं हैं, नाक नहीं है,

सीने पर कई दांत।

बिन मुख गाऊँ सभी राग मैं,

सदा करूँ रसीली बात।


2.सूरज-सा मेरा नाम है,

उस सा ही रूप बनाऊँ।

उसकी ओर ही करके मुखड़ा,

संग-संग चलता जाऊँ।


3.श्याम वर्ण और तीखे दांत,

लचक-लचक चले नारी।

जिससे मिले उसी को काटे,

तो भी लोग कहें उसे ‘आ री’।


4.रात-रात भर खुशबू देती,

खूब खिलाती फूल।

दिन निकले तो फूलों को,

महकाना जाती भूल।


5.हजारों घूमें बाग-बाग में,

मुँह से लाकर किया इकट्ठा।

उन्हें भगा कोई लूट ले गया,

रस चीनी से भी मीठा।

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उत्तर:1.हारमोनियम 2.सूरजमुखी 3. आरी 4. रजनीगंधा 5. शहद

गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010

ताजा खबर

रतन चन्द रत्नेश

चश्मा चढ़ाए आंखों पर,
बिल्ला जी पढ़ रहे थे अखबार।
एक खास खबर को वे
बांच रहे थे बार-बार।

तभी
रसोई से चीखी बिल्ली,
बाद में पढ़ना यह अखबार।
बच्चों ने नाश्ता करना है,
चूहे मार लाओ दो चार।

बिल्ला
बोला, तुम्हें खबर है
क्या कर रही अपनी सरकार।
चूहे अब मिला करेंगे,
खुलेआम बीच बाजार।
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रविवार, 19 सितंबर 2010

टमाटर


सुंदर-सुंदर लाल टमाटर

खाने को मन करता,

खट्टा-मीठा इसका स्वाद

सब का मन है हरता।


मम्मी इसको सब्जी कहती

‘मैम’ है कहती फल,

छोटी बहना मेरी इसको

कहती सदा टमाटल।


मम्मी सूप पिलाती इसका

और सलाद में देती रहती,

सॉस टमाटर का खाने को

हमारी लार टपकती रहती।

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रविवार, 5 सितंबर 2010

बाघ




लाल-पीला मिला हुआ रंग
ऊपर काली धारी।
कहीं-कहीं पर फिरी सफेदी
यह पहचान हमारी।

शरीर बहुत है लंबा
है भी भारी भरकम।
दौड़ तो बहुत तेज लगाते
पर जल्दी फूले दम।

सांभर, चीतल, भैंसे जंगली
बनें खुराक हमारी।
राष्ट्रीय-पशुकी मिली उपाधि
यह है शान हमारी।
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रविवार, 22 अगस्त 2010

पहेलियाँ-9

1.सुबह, दोपहर. शाम को,

मैं लोगों को भाती।

सब्जी के संग मेल है,

आदि कटे तो पाती।


2.लख से मेरा नाम है,

हूँ नवाबों का शहर।

राजधानी एक राज्य की,

नहीं मैं कोई गैर।


3.एक किले के लाख द्वार,

नहीं किसी के कोई कपाट,

फिर भी कोई घुस न पाए,

राजा सोए डाल के खाट।


4.दिन में चलती, रात को चलती,

नहीं करती कभी आराम।

सब उसको हैं देखा करते,

दीवार पर उसका धाम।


5.इधर की बात उधर मैं करता,

उधर की इधर बताता।

चुगलखोर पर कहे न कोई,

सबके काम मैं आता।

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पहेलियों के उत्तर:1.चपाती 2.लखनऊ 3.मच्छरदानी 4.दीवार घड़ी 5.टैलीफोन

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

काले बादल जाओ


घर में पानी, गली में पानी

भर कर बादल हंसते हो।

टीचर गया है छुट्टी पर क्या

जो इतने मस्ते हो।


पतंग उड़ानी बंद हो गई

बंद हुए सब खेल।

बुरा हाल कर दिया हमारा

घर बन गया जेल।

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