रविवार, 19 सितंबर 2010

टमाटर


सुंदर-सुंदर लाल टमाटर

खाने को मन करता,

खट्टा-मीठा इसका स्वाद

सब का मन है हरता।


मम्मी इसको सब्जी कहती

‘मैम’ है कहती फल,

छोटी बहना मेरी इसको

कहती सदा टमाटल।


मम्मी सूप पिलाती इसका

और सलाद में देती रहती,

सॉस टमाटर का खाने को

हमारी लार टपकती रहती।

*****

9 टिप्‍पणियां:

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) ने कहा…

बहुत सुन्दर बालगीत|
ब्रह्माण्ड

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

टमाटर की कविता तो बहुत सुंदर पर आज ज़रा मंहगा है...

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

इसे तो हम भी सलाद में खाते हैं!

रानीविशाल ने कहा…

यम यम .....मुझे भी टमाटर बहुत अच्छा लगता है
नन्ही ब्लॉगर
अनुष्का

चैतन्य शर्मा ने कहा…

यम्मी..... टमाटर तो बहुत ही अच्छे होते है. मैंने तो रेड कलर टमाटर से ही पहचाना सीखा है...thank you

Akshita (Pakhi) ने कहा…

मुझे तो टमाटर बहुत अच्छे लगते हैं..प्यारी बाल-कविता..बधाई.
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'पाखी की दुनिया' में 'करमाटांग बीच पर मस्ती...'

सहज साहित्य ने कहा…

आपने खूबसूरत कविता के माध्यम से टमाटर का पूरा इतिहास ही बता दिया है । इसका मूल नाम टमाटल ही था ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर बाल कविता है!
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आपकी पोस्ट की चर्चा तो यहाँ भी है!
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http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/09/18.html

Arshad Ali ने कहा…

sundar ji bahut sundar.
tamatar tamatar tamatar...maza aa gaya.