घर में पानी, गली में पानी
भर कर बादल हंसते हो।
टीचर गया है छुट्टी पर क्या
जो इतने मस्ते हो।
पतंग उड़ानी बंद हो गई
बंद हुए सब खेल।
बुरा हाल कर दिया हमारा
घर बन गया जेल।
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श्याम सुन्दर अग्रवाल
काले रंग का कौवा होता,
काली ही कोयल होती ।
कोयल का सम्मान करें सब,
कौवे की दुर्गति होती ।
रंग से कुछ फर्क न पड़ता,
पड़े गुणों का मोल ।
कौवे की कर्कश काँव-काँव,
कोयल के मीठे बोल ।
प्यार अगर पाना है बच्चो,
मधुर आवाज निकालो मुख से,
कानों में रस घोलो ।
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बच्चो, तुम्हारी सभी पुस्तकें कागज से बनी हुई होंगी। तुम सोचते होगे कि पुस्तकें केवल कागज से ही बनी होती हैं। मगर ऐसा नहीं है। पहले लोग वृक्षों के चौड़े पत्तों, लकड़ी के फट्टों तथा पत्थर पर भी लिखते थे। म्यांमार देश में पत्थर से बनी एक विशाल पुस्तक है। जानते हो कि यह पुस्तक किस पत्थर से बनी है? यह बनी है संगमरमर से। माली भाषा में लिखी इस पुस्तक में कुल 1460 पृष्ठ हैं। प्रत्येक पृष्ठ की लम्बाई 5 फुट, चौड़ाई 3.5 फुट तथा मोटाई आधा फुट है। इस पुस्तक की कुल लम्बई 1.6 किलोमीटर तथा कुल वजन 726 टन है। यह दुनिया की सबसे बड़ी पुस्तक कहलाती है।
यह पुस्तक मांडले पहाडियों की घाटी में बने एक पैगोडा के मैदान में स्तूपों के रूप में खड़ी है। इसके पन्नों के प्रत्येक सैट पर छत बनी है।
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बच्चो, जब भी हमें कभी कोई चीज जलानी होती है तो अकसर हम माचिस का प्रयोग करते हैं। माचिस की डिबिया से हम एक तीली निकालते हैं और उसे माचिस की कम चौडाई वाली साइड पर रगड़ते हैं। रगड़ने पर तीली जल उठती है। तुम्हारे मन में प्रश्न तो उठता ही होगा कि रगड़ने पर माचिस की तीली को आग कैसे लग जाती है?
बच्चो, तुमने यह तो देखा ही होगा कि माचिस की तीली को आग केवल तभी लगती है, जब उसे माचिस की साइड वाली खुरदरी सतह पर रगड़ा जाता है। अगर हम किसी अन्य खुरदरी सतह पर तीली को रगड़ें तो वह जलती नहीं। माचिस की खुरदरी सतह फास्फोरस के योगिकों से बनी होती है। फास्फोरस जरा सी ऊष्मा पाते ही चिंगारी देने लगती है। माचिस की तीली के काले सिरे पर पोटाशियम क्लोरेट लगा होता। पोटाशियम क्लोरेट काफी ज्वलनशील पदार्थ होता है। इसे माचिस की खुरदरी सतह पर रगड़ने से ऊष्मा पैदा होती है। ऊष्मा मिलते ही सतह से चिंगारी निकलती है। इस चिंगारी से तीली के सिरे पर लगा ज्वलनशील पदार्थ जलने लगता है। इस तरह जलती है तीली।
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