रविवार, 18 जुलाई 2010

पत्थर की पुस्तक



बच्चो, तुम्हारी सभी पुस्तकें कागज से बनी हुई होंगी। तुम सोचते होगे कि पुस्तकें केवल कागज से ही बनी होती हैं। मगर ऐसा नहीं है। पहले लोग वृक्षों के चौड़े पत्तों, लकड़ी के फट्टों तथा पत्थर पर भी लिखते थे। म्यांमार देश में पत्थर से बनी एक विशाल पुस्तक है। जानते हो कि यह पुस्तक किस पत्थर से बनी है? यह बनी है संगमरमर से। माली भाषा में लिखी इस पुस्त में कुल 1460 पृष्ठ हैं। प्रत्येक पृष्ठ की लम्बाई 5 फुट, चौड़ाई 3.5 फुट तथा मोटाई आधा फुट है। इस पुस्तक की कुल लम्बई 1.6 किलोमीटर तथा कुल वजन 726 टन है। यह दुनिया की सबसे बड़ी पुस्तक कहलाती है।






यह पुस्तक मांडले पहाडियों की घाटी में बने एक पैगोडा के मैदान में स्तूपों के रूप में खड़ी है। इसके पन्नों के प्रत्येक सैट पर छत बनी है।

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4 टिप्‍पणियां:

girish pankaj ने कहा…

vaah, achchhi jankari mili.dhanyvaad.

Akshita (Pakhi) ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी....
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'पाखी की दुनिया' में समीर अंकल के 'प्यारे-प्यारे पंछी' चूं-चूं कर रहे हैं...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत उपयोगी जानकारी है!
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आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है-
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/07/7.html

Rahul Singh ने कहा…

पत्‍थर की किताब की प्राचीनता और संदर्भ के लिए कोई लिंक दे सके तो आभारी रहूंगा. सभी सामग्रियां रोचक लगीं.
सुलभ संदर्भ के लिए मेरा मेल आईडी-
rahulsinghcg@gmail.com