गुरुवार, 29 जुलाई 2010

मीठा बोलो


श्याम सुन्दर अग्रवाल




काले रंग का कौवा होता,

काली ही कोयल होती ।

कोयल का सम्मान करें सब,

कौवे की दुर्गति होती ।



रंग से कुछ फर्क न पड़ता,

पड़े गुणों का मोल ।

कौवे की कर्कश काँव-काँव,

कोयल के मीठे बोल ।


प्यार अगर पाना है बच्चो,

मिश्री-सा मीठा बोलो,

मधुर आवाज निकालो मुख से,

कानों में रस घोलो ।

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1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर पोस्ट!
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इसकी चर्चा यहाँ भी है-
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/07/9.html