बुधवार, 30 सितंबर 2009

चमगादड़ उलटे क्यों लटकते हैं?



बच्चो, आपने बाग में से गुजरते हुए वृक्षों पर चमगादड़ों को लटकते हुए देखा होगा। कई बार तो ये एक ही वृक्ष पर बहुत बड़ी संख्या में लटक रहे होते हैं। तब तो ऐसा लगता है मानो वृक्षपर काले रंग के फल लटक रहे हों। चमगादड़ कई और जगह भी लटके हुए दिखाई दे जाते हैं।लेकिन ये कहीं भी लटके हों, सदा उलटे ही लटके होते हैं। चमगादड़ आपको कभी भी सीधा बैठा हुआ दिखाई नहीं दिया होगा। आओ जानें कि चमगादड़ सदा उलटा ही क्यों लटकता है।
चमगादड़ के उलटा लटकने का मुख्य कारण यह है कि इसके पैरों की हड्डियाँ बहुत कमज़ोर होती हैं। इसकी कमजोर हड्डियाँ इसके शरीर का भार उठा या संभाल नहीं पातीं। जब चमगादड़ जमीन पर होते हैं तब अपने शरीर का सारा भार जमीन पर ही डाल देते हैं। ऐसा करने से पैरों पर शरीर का भार बहुत
पड़ता है। तभी नीचे बैठा हुआ चमगादड़ जमीन पर पसरा हुआ दिखाई देता है।
जब चमगादड़ वृक्ष की किसी शाखा पर उलटे लटकते हैं, तब उनके शरीर का भार पैरों पर पड़ कर शरीर की तनी हुई मांसपेशियों और स्नायुओं पर पड़ता है। अपने पैरों को बचाने के लिए ही चमगादड़ वृक्ष पर उलटे लटकते हैं।
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1 टिप्पणी:

समयचक्र - महेंद्र मिश्र ने कहा…

इसीलिए उलटे लटकते है की नीचे सब कुछ साफ साफ देख सके हा हा .
बहुत सुन्दर उम्दा