शनिवार, 12 सितंबर 2009

मेरी प्यारी दादी-माँ



श्याम सुन्दर अग्रवाल


मेरी प्यारी दादी-माँ,

सब से न्यारी दादी-माँ ।

बड़े प्यार से सुबह उठाए,

मुझको मेरी दादी-माँ ।


नहला कर वस्त्र पहनाए,

खूब सजाए दादी-माँ ।

उठा कर बैग स्कूल का,

मेरे संग-संग जाए दादी-माँ ।


आप न खाए मुझे खिलाए,

ऐसी प्यारी दादी-माँ ।

फलों का जूस, गिलास दूध का,

मुझे रोज पिलाए दादी-माँ ।


सुंदर वस्त्र और खिलौने,

मुझे दिलाए दादी-माँ ।

बात सुनाए, गीत सुनाए,

रूठूँ तो मनाए दादी-माँ ।


यह करना है, वह नहीं करना,

नित्य समझाए दादी-माँ ।

लोरी देकर पास सुलाए,

मेरी प्यारी दादी-माँ ।।

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2 टिप्‍पणियां:

सहज साहित्य ने कहा…

इस कविता में बहुत स्नेह पगा है ।
रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'

Kamlesh ने कहा…

दादी-मां की सही व सुन्दर तस्वीर!