गुरुवार, 3 मार्च 2011

बच्चों ने धूप से बनाया आमलेट


रविवार के दिन बच्चे घर पर अकेले थे। उन का मन आमलेट खाने को कर रहा था। फ्रिज में अंडे पड़े थे, लेकिन रसोई में गैस का सिलेंडर खाली था। उनकी माँ शायद गैस का इंतजाम करने ही गई थी।
जब रोहित ने आमलेट खाने की जिद्द की तो उसकी बड़ी बहन तान्या ने कहा, आज हम धूप से आमलेट बना कर देखते हैं।
तान्या ने घर के लॉन में पड़ी एक पुरानी डिश के भीतरी भाग में कुछ पुराने शीशे (दर्पण) लगा दिए। सभी शीशों का मुँह सूरज की ओर कर दिया। डिश के किनारों से जुड़ी लोहे की तीन सलाखों के ऊपर एक गोल चक्कर था। सभी दर्पण सूरज की रोशनी को उस गोल चक्कर पर फेंक रहे थे। तान्या ने एक फ्राइंगपैन चक्कर पर रख दिया। बच्चों ने देखा कि फाइंगपैन बिना आग के ही बहुत गर्म हो गया था।
तान्या ने गर्म फ्रइंगपैन में थोड़ा मक्खन डाला। मक्खन जल्दी ही पिघल गया। फिर तान्या ने थोड़ा मसाला डाला तथा पैन को हिलाया। अंत में कुछ अंडे तोड़ कर उसमें डाल दिए गए। बच्चे बहुत उत्साहित थे। मात्र पाँच-छः मिनट में ही उनके लिए आमलेट बन कर तैयार हो गया था।
रोहित, तान्या तथा सबसे छोटी कनु बहुत मजे से आमलेट खा रहे थे। आमलेट बना ही बहुत स्वादिष्ट था। रोहित बोला, दीदी, अब हम धूप से ही आमलेट बनाया करेंगे।
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1 टिप्पणी:

दर्शन लाल बवेजा ने कहा…

वाह तान्या आप तो बहुत होशियार है ऐसे ही आगे बढते चलो ..........